दुनिया का सबसे लंबा रेलवे प्लेटफॉर्म: ओलंपिक ट्रैक से भी ज्यादा लंबा, भारत में ही छिपा है ये गिनीज रिकॉर्ड!

रेल यात्रा का रोमांच तो हर किसी को भाता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक रेलवे प्लेटफॉर्म इतना लंबा हो सकता है कि वो कई ओलंपिक ट्रैक से भी आगे निकल जाए? जी हां, बात हो रही है दुनिया के सबसे लंबे रेलवे प्लेटफॉर्म की, जो न तो जापान में है और न ही चीन में, बल्कि हमारे ही भारत के कर्नाटक राज्य में स्थित है। ये कोई साधारण प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड का धारक है, जो भारतीय रेलवे की इंजीनियरिंग क्षमता का जीताजागता प्रमाण है। इस लेख में हम इस अनोखी उपलब्धि की पूरी कहानी जानेंगे, ताकि आप भी इस पर गर्व महसूस करें।

भारतीय रेलवे हमेशा से देश की रीढ़ की हड्डी रहा है। लाखों यात्रियों को जोड़ने वाला ये नेटवर्क अब वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बना रहा है। हब्बली जंक्शन का ये प्लेटफॉर्म न सिर्फ लंबाई में चमत्कारिक है, बल्कि यह यात्रियों की सुविधा और ट्रेन संचालन की दक्षता को भी बढ़ा रहा है। आइए, इसकी विस्तृत जानकारी पर नजर डालें।

दुनिया का सबसे लंबा रेलवे प्लेटफॉर्म कहां स्थित है?

हब्बली जंक्शन, जो आधिकारिक तौर पर श्री सिद्धारूढ़ स्वामीजी हब्बली जंक्शन के नाम से जाना जाता है, कर्नाटक के उत्तरी हिस्से में स्थित है। ये स्टेशन दक्षिण पश्चिमी रेलवे का महत्वपूर्ण केंद्र है और हुब्बलीधारवाड़ शहरों को जोड़ता है। यहां का सबसे लंबा रेलवे प्लेटफॉर्म 2023 में बनकर तैयार हुआ और जल्द ही इसने वैश्विक रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।

इस स्टेशन की खासियत ये है कि ये न सिर्फ मालगाड़ियों बल्कि यात्री ट्रेनों के लिए भी व्यस्त रहता है। कर्नाटक का ये हिस्सा कृषि और उद्योग के लिए जाना जाता है, और हब्बली जंक्शन यहां से गुजरने वाली ट्रेनों का मुख्य हब है। पहले ये स्टेशन सामान्य था, लेकिन रेलवे के आधुनिकीकरण प्रोजेक्ट के तहत इस प्लेटफॉर्म को विस्तार दिया गया। अब ये प्लेटफॉर्म नई दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसी बड़ी सहरों को जोड़ने वाली ट्रेनों को बेहतर तरीके से संभाल सकता है।

कई लोग सोचते हैं कि सबसे लंबा रेलवे प्लेटफॉर्म एशिया के विकसित देशों जैसे जापान या चीन में होगा, लेकिन भारत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हमारी इंजीनियरिंग दुनिया से पीछे नहीं है। ये प्लेटफॉर्म न सिर्फ यात्रियों को आराम देता है, बल्कि रेलवे की क्षमता को दोगुना कर रहा है।

इस प्लेटफॉर्म की लंबाई कितनी है? ओलंपिक ट्रैक से तुलना

दुनिया का सबसे लंबा रेलवे प्लेटफॉर्म कुल 1,507 मीटर लंबा है। ये लंबाई इतनी ज्यादा है कि एक ओलंपिक ट्रैक जो 400 मीटर का होता है, उसके मुकाबले ये लगभग चार ट्रैक जितना लंबा है। कल्पना कीजिए, एक प्लेटफॉर्म जो फुटबॉल फील्ड से भी ज्यादा फैला हुआ होये तो वाकई चमत्कार है!

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के अनुसार, ये प्लेटफॉर्म 12 जनवरी 2023 को सत्यापित हुआ। इससे पहले उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जंक्शन का प्लेटफॉर्म 1,366 मीटर लंबा था, जो दुनिया का दूसरा सबसे लंबा है। लेकिन हब्बली ने इस रिकॉर्ड को तोड़ दिया। एक ट्रेन के कोच की औसत लंबाई 20-25 मीटर होती है, तो इस प्लेटफॉर्म पर दो पूरी लंबी ट्रेनें एक साथ खड़ी हो सकती हैं।

ओलंपिक ट्रैक की तुलना करें तो, एक स्टैंडर्ड ट्रैक 400 मीटर का होता है। तो 1,507 मीटर का मतलब है कि ये प्लेटफॉर्म तीन से चार ओलंपिक ट्रैक को मिलाकर भी ज्यादा लंबा है। ये न सिर्फ ट्रेनों को स्पेस देता है, बल्कि प्लेटफॉर्म पर भीड़ प्रबंधन को आसान बनाता है। यात्रियों को अब इधरउधर भागना नहीं पड़ता, क्योंकि प्लेटफॉर्म इतना विशाल है कि सभी को जगह मिल जाती है।

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड कैसे मिला? निर्माण की पूरी कहानी

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड प्राप्त करने की प्रक्रिया आसान नहीं होती। साउथ वेस्टर्न रेलवे हब्बली डिवीजन ने इस प्लेटफॉर्म का निर्माण हब्बली यार्ड रीमॉडलिंग प्रोजेक्ट के तहत किया। ये प्रोजेक्ट ट्रेन संचालन की सुरक्षा, यात्री सुविधाओं और दक्षता बढ़ाने के लिए शुरू हुआ था। कुल लागत करीब 20 करोड़ रुपये आई, जो भारतीय रेलवे के बड़े निवेश का हिस्सा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस प्लेटफॉर्म का उद्घाटन किया, जो इसे और खास बनाता है। निर्माण के दौरान इंजीनियरों ने विशेष ध्यान दिया कि प्लेटफॉर्म मजबूत हो और भारी ट्रेनों का बोझ सह सके। ये प्लेटफॉर्म अब दो दिशाओं से आने वाली ट्रेनों को एक साथ हैंडल कर सकता है, जिससे देरी कम होती है।

भारतीय रेलवे के इतिहास में ऐसे प्रोजेक्ट दुर्लभ हैं। 19वीं सदी से शुरू हुए रेल नेटवर्क ने आज 1.23 लाख किलोमीटर से ज्यादा ट्रैक कवर कर लिया है। हब्बली जंक्शन का ये प्लेटफॉर्म आधुनिक भारत का प्रतीक है, जहां तकनीक और परंपरा का मेल है। स्थानीय लोग इसे गर्व से देखते हैं, क्योंकि ये उनकी अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है।

निर्माण में क्या चुनौतियां आईं?

किसी भी बड़े प्रोजेक्ट में चुनौतियां तो आती ही हैं। हब्बली जंक्शन के प्लेटफॉर्म को बनाने में मौसम, जमीन की स्थिति और ट्रेन ट्रैफिक जैसी बाधाएं आईं। लेकिन रेलवे टीम ने 24/7 काम करके इसे समय पर पूरा किया। सुरक्षा के लिए विशेष मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए गए, ताकि निर्माण के दौरान कोई हादसा न हो।

इस प्रोजेक्ट से जुड़े मजदूरों और इंजीनियरों की मेहनत सराहनीय है। उन्होंने न सिर्फ लंबाई बढ़ाई, बल्कि प्लेटफॉर्म पर लिफ्ट, एस्केलेटर और वाईफाई जैसी सुविधाएं भी जोड़ीं।

दुनिया के टॉप 10 सबसे लंबे रेलवे प्लेटफॉर्म की सूची

सबसे लंबा रेलवे प्लेटफॉर्म तो हब्बली का है, लेकिन दुनिया में कई अन्य भी हैं जो लंबाई में प्रतिस्पर्धा करते हैं। आइए, टॉप 10 की सूची देखें:

रैंक

रेलवे स्टेशन

देश

लंबाई (मीटर में)

1

हब्बली जंक्शन

भारत

1,507

2

गोरखपुर जंक्शन

भारत

1,366

3

कोल्लम जंक्शन

भारत

1,180

4

खड़गपुर जंक्शन

भारत

1,072

5

स्टेट स्ट्रीट सबवे

अमेरिका

1,067

6

बिलासपुर जंक्शन

भारत

1,055

7

झांसी जंक्शन

भारत

1,050

8

सीअलदाह स्टेशन

भारत

1,000

9

अहमदाबाद जंक्शन

भारत

987

10

बारधमान जंक्शन

भारत

974

इस सूची से साफ है कि भारत के पास दुनिया के आधे से ज्यादा लंबे रेलवे प्लेटफॉर्म हैं। ये भारतीय रेलवे की ताकत को दर्शाता है।

भारत में अन्य प्रमुख लंबे प्लेटफॉर्म

भारत में गोरखपुर जंक्शन का प्लेटफॉर्म पहले नंबर पर था। ये उत्तर पूर्वी रेलवे का मुख्यालय है और नेपाल तथा बिहार को जोड़ता है। 1981 में मीटर गेज से ब्रॉड गेज में बदला गया, जिससे इसकी क्षमता बढ़ी। अब ये दूसरा सबसे लंबा रेलवे प्लेटफॉर्म है।

खड़गपुर जंक्शन पश्चिम बंगाल में एशिया का सबसे पुराना स्टेशन है। इसका प्लेटफॉर्म 1,072 मीटर लंबा है और दैनिक सैकड़ों ट्रेनें यहां रुकती हैं। इसी तरह, कोल्लम जंक्शन केरल में 1,180 मीटर का है, जो दक्षिण भारत का व्यस्त केंद्र है। ये सभी प्लेटफॉर्म यात्रियों की बढ़ती संख्या को संभालने के लिए बने हैं।

इस प्लेटफॉर्म के फायदे: यात्रियों और अर्थव्यवस्था के लिए क्या?

सबसे लंबा रेलवे प्लेटफॉर्म सिर्फ रिकॉर्ड के लिए नहीं, बल्कि व्यावहारिक फायदों के लिए भी महत्वपूर्ण है। सबसे बड़ा लाभ ये है कि दो ट्रेनें एक साथ आजा सकती हैं, जिससे समय की बचत होती है। हब्बलीधारवाड़ क्षेत्र में ट्रेन सेवाओं की मांग बढ़ रही थी, और ये प्लेटफॉर्म उसकी पूर्ति करता है।

यात्रियों के लिए, विशाल प्लेटफॉर्म पर भीड़ कम लगती है। अब लोग आराम से चायनाश्ता कर सकते हैं, बिना भागदौड़ के। रेलवे ने यहां बेंच, शौचालय और डिजिटल स्क्रीन भी लगाई हैं। स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा हो रहा हैज्यादा ट्रेनें मतलब ज्यादा व्यापार और रोजगार। कर्नाटक सरकार का मानना है कि ये प्रोजेक्ट क्षेत्र के विकास को गति देगा।

गिनीज रिकॉर्ड मिलने से पर्यटन भी बढ़ा है। लोग अब हब्बली घूमने आते हैं, सिर्फ इस प्लेटफॉर्म को देखने। भारतीय रेलवे के अन्य प्रोजेक्ट जैसे वंदे भारत ट्रेनें भी इसी दिशा में योगदान दे रही हैं।

पर्यावरण और सुरक्षा के पहलू

निर्माण में पर्यावरण का ध्यान रखा गया। प्लेटफॉर्म को हरेभरे पेड़ों से घिरा बनाया गया, ताकि गर्मी कम हो। सुरक्षा के लिए CCTV, फायर अलार्म और आपातकालीन निकास जोड़े गए। रेलवे स्टाफ को विशेष ट्रेनिंग दी गई है, जो ओलंपिक ट्रैक जैसी बड़ी घटनाओं की तरह भीड़ प्रबंधन कर सके।

भविष्य में, ये प्लेटफॉर्म AI और स्मार्ट टेक्नोलॉजी से लैस हो सकता है, जो ट्रेनों की टाइमिंग को और बेहतर बनाएगा।

भारतीय रेलवे का इतिहास और भविष्य

भारतीय रेलवे की शुरुआत 1853 में हुई, जब पहली ट्रेन मुंबई से ठाणे चली। आज ये दुनिया का चौथा सबसे बड़ा नेटवर्क है, जिसमें 7,500 से ज्यादा स्टेशन हैं। हब्बली जंक्शन जैसे प्रोजेक्ट आधुनिकीकरण का हिस्सा हैं, जो 2024-25 के बजट में 2.5 लाख करोड़ रुपये आवंटित हैं।

भविष्य में, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और हाईस्पीड रेल जैसी योजनाएं रेल यात्रा को क्रांतिकारी बनाएंगी। सबसे लंबा रेलवे प्लेटफॉर्म इसकी दिशा का संकेत है।

अन्य देशों से तुलना

जापान और चीन के रेलवे उन्नत हैं, लेकिन उनके प्लेटफॉर्म हब्बली जितने लंबे नहीं। अमेरिका का स्टेट स्ट्रीट सबवे 1,067 मीटर का है, लेकिन भारत के प्लेटफॉर्म यात्रियों की संख्या में आगे हैं। ये तुलना दिखाती है कि भारत विकासशील देशों में लीडर है।

निष्कर्ष: भारत की रेल यात्रा का नया अध्याय

दुनिया का सबसे लंबा रेलवे प्लेटफॉर्म न सिर्फ एक रिकॉर्ड है, बल्कि लाखों यात्रियों के सपनों को जोड़ने वाला पुल है। हब्बली जंक्शन की ये उपलब्धि हमें गर्व देती है और भविष्य की संभावनाओं को खोलती है। अगर आप कभी वहां जाएं, तो इस विशाल प्लेटफॉर्म को जरूर देखेंये अनुभव अविस्मरणीय होगा। भारतीय रेलवे आगे बढ़ता रहे, ऐसी कामना।

डिस्क्लेमर

यह जानकारी सार्वजनिक स्रोतों और आधिकारिक घोषणाओं पर आधारित है तथा केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी निर्णय लेने से पहले आधिकारिक स्रोतों से सत्यापन करें।

Leave a Comment