उत्तरी उत्तराखंड में बाढ़ ने नष्ट किया प्राचीन Kalp Kedar temple, kedarnath जैसी अनोखी वास्तुकला का हुआ नुकसान!

Kalp Kedar temple
Kalp Kedar temple

उत्तरी Uttarakhand में आई बाढ़ ने किया प्राचीन Kalp Kedar temple को नष्ट, शिवलिंग का दृश्य भी मिट्टी में दबा

Uttarakhand के उत्तरी क्षेत्र में स्थित प्राचीन Kalp Kedar temple पर एक अभूतपूर्व त्रासदी का साया मंडराया है। पिछले मंगलवार को कृर गंगा नदी में आई अचानक बाढ़ ने मंदिर को मलबे में दबा दिया, जिससे इस ऐतिहासिक स्थल की सुंदरता और महत्व पर गहरा प्रभाव पड़ा। इस मंदिर का इतिहास और वास्तुकला अत्यधिक महत्वपूर्ण है, और यह क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक था।

Kalp Kedar temple का निर्माण कातुर शैली में किया गया था, जो वास्तुकला के मामलों में एक विशिष्ट और प्राचीन शैली मानी जाती है। यह शैली, जो केदारनाथ धाम के मंदिर से बहुत मिलतीजुलती है, मंदिर के निर्माण को अत्यधिक खास बनाती है। यह वही स्थान है, जहाँ से हजारों भक्त हर साल Kedarnath temple के दर्शन के लिए आते थे।

मंदिर का ऐतिहासिक महत्व केवल इसकी वास्तुकला तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी धार्मिक स्थिति भी अत्यधिक प्रभावशाली थी। इस मंदिर को हमेशा एक स्थान माना जाता था, जहां लोग अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए आते थे। किंवदंती है कि इस मंदिर के गर्भगृह में स्थित शिवलिंग कभी कभी Kheer Ganga River के पानी से भी भीगता था, और इसके लिए एक विशेष मार्ग भी बनाया गया था। भक्तों का मानना था कि इस पानी के संपर्क से उनके पाप धो दिए जाते थे।

मंदिर की खोज

यह प्राचीन मंदिर वर्षों तक जमीन के नीचे दबा रहा था। 1945 में एक खुदाई अभियान के दौरान इस मंदिर की खोज की गई थी। खुदाई में कई फीट गहरे जाकर मंदिर का ढांचा पाया गया, जो स्पष्ट रूप से Kedarnath temple की वास्तुकला के समान था। इसका निर्माण शैली और डिजाइन दोनों ही अद्वितीय थे, जो इसे एक ऐतिहासिक धरोहर का दर्जा देते हैं। मंदिर भूमिगत था, और भक्तों को पूजा अर्चना करने के लिए नीचे उतरना पड़ता था, जो इस मंदिर की विशेषता थी।

मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग का आकार नंदी के पीठ की तरह था, ठीक वैसे ही जैसे Kedarnath temple में होता है। यह आकार और संरचना उस समय के कला और धार्मिक विचारों का प्रतीक था। इस मंदिर की एक और महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि यहाँ एक रास्ता था, जिसके माध्यम से पानी, जो कभीकभी कीर गंगा से आता था, गर्भगृह में स्थित शिवलिंग तक पहुंचता था। यह एक प्राचीन धार्मिक परंपरा को दर्शाता था, जिसे सदियों से लोग मानते आए थे।

प्राचीन मंदिर की महत्ता

Kalp Kedar temple को न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्व दिया गया था, बल्कि यह Uttarakhand की संस्कृति और इतिहास का भी महत्वपूर्ण हिस्सा था। इस मंदिर के बारे में प्राचीन शास्त्रों और ग्रंथों में भी उल्लेख मिलता है। इसके होने से उस समय के धार्मिक अनुष्ठान और पूजा विधियाँ भी परिलक्षित होती हैं, जो इसे भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बनाती हैं।

मंदिर के बाहर की दीवारों पर पत्थरों से उकेरी गई नक्काशी भी इस बात का प्रमाण है कि इस मंदिर का निर्माण अत्यधिक शिल्पकला के साथ किया गया था। यह नक्काशी भारतीय वास्तुकला की उत्कृष्टता को दर्शाती है।

Kheer Ganga River का पानी इस मंदिर में महत्वपूर्ण धार्मिक भूमिका निभाता था। इसे एक विशेष कारण के तहत मंदिर के गर्भगृह तक पहुँचने का मार्ग दिया गया था, जिससे यह धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बन गया था। स्थानीय लोग मानते थे कि इस नदी के पानी से शिवलिंग की पूजा करने से आत्मा को शांति और मोक्ष मिलता था।

बाढ़ का असर

हालांकि, यह मंदिर अब मलबे में दब चुका है, लेकिन इसका ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व कभी खत्म नहीं हो सकता। Kheer Ganga River में बाढ़ आना एक दुर्लभ घटना नहीं है, लेकिन इस बार की बाढ़ ने इस प्राचीन मंदिर को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है। यह एक संकेत है कि प्राकृतिक आपदाएँ कभी भी किसी भी समय हो सकती हैं, और हमें अपने सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण करना चाहिए।

स्थानीय लोग अभी भी इस मंदिर की खोज और इसके महत्व के बारे में बात करते हैं। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण था, बल्कि इसके साथ जुड़ी हुई ऐतिहासिक घटनाएँ भी लोगों के दिलों में जीवित हैं। कुछ लोग कहते हैं कि यह मंदिर पुनः उभर सकता है, लेकिन समय के साथ इसके पुनर्निर्माण की संभावना भी काफी कम है।

भविष्य की दिशा

अब यह जरूरी है कि सरकार और स्थानीय प्रशासन इस तरह के ऐतिहासिक स्थलों की रक्षा के लिए कदम उठाएं। भविष्य में आने वाली बाढ़ों और प्राकृतिक आपदाओं से इन स्थलों को बचाने के लिए कुछ ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। Kalp Kedar temple की पुनर्निर्माण की प्रक्रिया केवल एक सांस्कृतिक पुनरुद्धार नहीं होगी, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक शिक्षा का काम करेगी।

Uttarkashi cloudburst : 4 की मौत, फ्लैश बाढ़ ने धाराली में घर और होटलों को बहा लिया – देखें तबाही का असर”

Uttarkashi cloudburst

Uttarkashi cloudburst : फ्लैश फ्लड ने घरों, होटलों को निगला, 4 की मौत, पूरा गांव बहा

Uttarkashi cloudburst

उत्तरकाशी जिले के धाराली गांव में cloudburst से उत्पन्न flash flood ने व्यापक तबाही मचाई, जिससे घर, दुकानें और सड़कें बह गईं। राहत कार्यों के लिए SDRF और सेना की टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं, और श्रमिकों के फंसे होने का खतरा भी जताया गया है। Meteorological Department ने उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में 10 अगस्त तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।

देहरादून: मंगलवार को उत्तरकाशी जिले के धाराली गांव में Kheer Ganga river के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में cloudburst के कारण एक भीषण flash flood आया, जिससे चार लोगों की मौत हो गई और कई लोग लापता हो गए।

उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने इस flash flood में चार लोगों की मौत की पुष्टि की।

यहां एक भारी flash flood आया है। हम जीवन और संपत्ति के नुकसान का मूल्यांकन कर रहे हैं,” आर्य ने कहा।

उन्होंने बताया कि सेना, National Disaster Response Force (NDRF) और State Disaster Response Force (SDRF) की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में खोज और बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं।

आर्य ने कहा कि प्रभावित क्षेत्र में कई छोटे गेस्ट हाउस, होटल और रेस्तरां स्थित हैं।

इन्हें ध्यान में रखते हुए, हमने बचाव टीमों को भेज दिया है। तहसील और लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीमें पहले ही मौके पर पहुंच चुकी हैं,” उन्होंने कहा।

इसी बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तरकाशी के धाराली क्षेत्र में cloudburst से हुई व्यापक तबाही को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बात की।

गृह मंत्री ने भारततिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और NDRF को राहत और बचाव कार्यों के लिए तेजी से टीमों को भेजने का निर्देश दिया।

बाढ़ के पानी की जबरदस्त ताकत ने धाराली गांव में घरों, दुकानों और सड़कों को बहा दिया, और मलबा और कीचड़ का ढेर छोड़ दिया।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कुछ होटलों और होमस्टे को बाढ़ ने पूरी तरह से नष्ट कर दिया है।

स्थानीय लोग डर रहे हैं कि 10 से 12 श्रमिक मलबे में फंसे हो सकते हैं।

इसके अलावा, बारकोट तहसील के बनाला पट्टी क्षेत्र में लगभग 18 बकरियां बह गईं, जब Kud Gadhera नाला उफान पर था।

Meteorological Department ने 10 अगस्त तक उत्तराखंड में विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जहां तेज बौछारें होने की संभावना है।

राहत कार्यों के लिए Harsil और Bhatwari से टीमें भेजी गई हैं, और अब फंसे लोगों को बचाने के प्रयास जारी हैं।

एक युग का अंत: India Post की Registered Post सेवा 1 सितंबर से बंद, अब Speed Post से होगा बदलाव – जानें Indian Post का नया कदम!

Registered Post
Registered Post

भारत में एक युग का अंत: 1 सितंबर से Registered Post सेवा बंद करेगी इंडिया पोस्ट

India Post ने घोषणा की है कि वह अपनी प्रतिष्ठित Registered Post सेवा को 1 सितंबर 2025 से समाप्त करने जा रहा है। यह कदम Speed Post के साथ Registered Post के एकीकरण के हिस्से के रूप में उठाया गया है, जिसका उद्देश्य संचालन को आधुनिक बनाना है। इस बदलाव के साथ, India Post 50 साल पुरानी सेवा को अलविदा कहेगा, जो अपनी विश्वसनीयता, सस्ती कीमत और कानूनी वैधता के लिए जानी जाती थी।

Registered Post का उपयोग महत्वपूर्ण दस्तावेजों जैसे कि नौकरी की नियुक्ति पत्र, कानूनी नोटिस और सरकारी पत्राचार के वितरण के लिए किया जाता था। इस सेवा का भारतीयों के जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है।

Registered Post सेवा का गिरता उपयोग

India Post द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2011-12 से 2019-20 तक, Registered Post से भेजे गए आइटम्स में 25% की गिरावट आई है। 2011-12 में 244.4 मिलियन से घटकर 2019-20 में यह संख्या 184.6 मिलियन तक पहुँच गई। इसके पीछे डिजिटल प्लेटफॉर्मों की बढ़ती लोकप्रियता और निजी कूरियर कंपनियों और ईकॉमर्स लॉजिस्टिक्स का बढ़ता प्रतिस्पर्धा मुख्य कारण हैं।

Registered Post के आंकड़े और डिजिटल परिवर्तन

हालांकि, आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2011-12 से 2019-20 के बीच रजिस्टर्ड पोस्ट के उपयोग में 25% की गिरावट आई है, जो डिजिटल परिवर्तन और निजी कूरियर कंपनियों से प्रतिस्पर्धा के कारण हुआ। 2011-12 में रजिस्टर्ड पोस्ट की कुल संख्या 244.4 मिलियन थी, जो 2019-20 में घटकर 184.6 मिलियन रह गई।

Speed Post के साथ एकीकरण

India Post के सचिव और निदेशक जनरल ने सभी विभागों, अदालतों, शैक्षिक संस्थानों और उपयोगकर्ताओं को नए सिस्टम में 1 सितंबर तक स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है। इस एकीकरण का उद्देश्य Speed Post के तहत सेवाओं को समेकित करना है, जिससे ट्रैकिंग की सटीकता, वितरण की गति और परिचालन दक्षता में सुधार हो सके। Speed Post, जो 1986 से संचालित हो रहा है, अब India Post के तहत अन्य सेवाओं का हिस्सा बनेगा।

हालाँकि, इस बदलाव के साथ एक समस्या भी सामने आई है, और वह है कीमत का अंतर। Speed Post की कीमतें Registered Post से अधिक हैं। जहाँ Registered Post का प्रारंभिक शुल्क 25.96 था और हर 20 ग्राम पर 5 की अतिरिक्त लागत थी, वहीं Speed Post की कीमत 41 से शुरू होती है, जो कि 20-25% महँगी है। यह बढ़ी हुई कीमत ग्रामीण भारत, छोटे व्यापारियों, किसानों और सामान्य नागरिकों पर असर डाल सकती है, जो सस्ती सेवाओं पर निर्भर करते हैं।

एक डिजिटल युग में बदलाव की आवश्यकता

अधिकारियों का कहना है कि यह बदलाव डिजिटल युग की मांगों को पूरा करने के लिए आवश्यक था। India Post का मानना है कि यह कदम उपयोगकर्ताओं की बदलती जरूरतों और अपेक्षाओं के हिसाब से उठाया गया है।

बीती यादें और नॉस्टेल्जिया

इस बदलाव ने उन लोगों में नॉस्टेल्जिया (बीती यादों) को जन्म दिया है, जिन्होंने Registered Post सेवा का इस्तेमाल वर्षों तक किया। खासतौर पर पुराने पीढ़ी और ग्रामीण समुदायों में, जिन्हें यह सेवा भरोसे का प्रतीक माना जाता था।

Registered Post का इतिहास ब्रिटिश काल से जुड़ा हुआ है, जब यह एक सुरक्षित और कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त दस्तावेजों को भेजने का भरोसेमंद तरीका था। इस सेवा का उपयोग बैंक, विश्वविद्यालयों और सरकारी निकायों द्वारा किया जाता था, क्योंकि इसे डिलीवरी का प्रमाण माना जाता था और यह अदालतों में स्वीकार्य था।

Speed Post में कोई खास बदलाव नहीं

India Post का कहना है कि Speed Post में ट्रैकिंग और स्वीकृति जैसी प्रमुख सुविधाएं बनी रहेंगी, जो Registered Post में थीं। हालांकि, इस बदलाव के बाद भी कई लोग इस सेवा की कमी महसूस करेंगे, खासकर वे लोग जो वर्षों से इसे इस्तेमाल कर रहे थे।

आखिरकार, India Post की यह सेवा पूरी तरह से बदलने जा रही है, लेकिन इसके स्थान पर Speed Post की बढ़ी हुई सुविधाएं ग्राहकों को आधुनिक और तेज़ सेवा देने में मदद करेंगी।

India Post, जो वर्षों से भारतीयों के बीच एक विश्वसनीय और सस्ती सेवा के रूप में जानी जाती रही है, अब डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक और कदम बढ़ाने जा रहा है।

निष्क

हालांकि यह बदलाव कुछ के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन यह डिजिटल युग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। Speed Post के साथ विलय से डाक सेवाओं का संचालन अधिक प्रभावी और तेज होगा, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि यह बदलाव ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सस्ती और पहुंच योग्य बना रहे।

दुनिया का इकलौता Gisborne Airport: जहां रनवे के बीचोंबीच से गुजरती है ट्रेन! देखिए हैरान कर देने वाला नज़ारा

Gisborne Airport
Gisborne Airport

Gisborne Airport: जहां रेल और विमान एक ही रनवे पर चलते हैं

क्या आपने कभी सोचा है कि एक ही जगह पर ट्रेन और विमान एक साथ चल सकते हैं? गिसबोर्न एयरपोर्ट (Gisborne Airport) न्यूज़ीलैंड में वह एकमात्र एयरपोर्ट है जहां रेलवे लाइन रनवे के ऊपर से होकर गुजरती है। हां, आपने सही सुना, यहां train crossing airport runway होती है, और यह हर रोज़ का सामान्य दृश्य है। दुनिया में ऐसा कोई और एयरपोर्ट नहीं है जहां यह दोनों चीजें एक साथ होती हों। यह तकनीकी दृष्टि से एक अद्भुत व्यवस्था है, और यहां का हर दृश्य एक बेहतरीन railway and air traffic coordination का उदाहरण है।

विमान और ट्रेन कैसे एक ही रास्ते पर चलते हैं?

गिसबोर्न एयरपोर्ट में train crossing airport runway होने की वजह से यहां पर हर गतिविधि को ध्यानपूर्वक योजनाबद्ध किया जाता है। इस एयरपोर्ट पर समय की अहमियत बहुत अधिक है। जब तक एयरपोर्ट के एटीसी (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) से अनुमति नहीं मिलती, तब तक ट्रेन को रनवे पार करने की इजाजत नहीं मिलती। जब विमान Gisborne Airport के रनवे पर उतरने या उड़ान भरने के लिए तैयार होता है, तो ट्रेन रुक जाती है और तब तक खड़ी रहती है जब तक रनवे सुरक्षित नहीं हो जाता। ऐसे में railway and air traffic coordination का काम और भी अहम हो जाता है।

यह एयरपोर्ट न्यूजीलैंड के उत्तरी द्वीप के पूर्वी तट पर स्थित है और यहां हर साल 150,000 से अधिक यात्री आते हैं। इसके अलावा, यहां हर सप्ताह 60 से अधिक घरेलू उड़ानें भी संचालित होती हैं। गिसबोर्न एयरपोर्ट के मुख्य रनवे में होने वाली train crossing airport runway इसे पूरी दुनिया में एक अनोखा एयरपोर्ट बनाती है।

पर्यटकों के लिए एक अद्भुत दृश्य

गिसबोर्न एयरपोर्ट पर यह अद्भुत दृश्य किसी फिल्म से कम नहीं होता। दुनियाभर से यात्री यहां आते हैं, ताकि वे Gisborne Airport पर ट्रेन को रनवे पार करते हुए देख सकें। यह सिर्फ एक सामान्य प्रक्रिया नहीं है, बल्कि एक परफेक्ट उदाहरण है कि कैसे railway and air traffic coordination और अच्छी योजनाबद्ध व्यवस्था के साथ यह दोनों एक साथ चलते हैं। यह दृश्य कई पर्यटकों के लिए यादगार बन जाता है। अगर आप न्यूजीलैंड जा रहे हैं, तो इस एयरपोर्ट को अपनी यात्रा की लिस्ट में जरूर जोड़ें।

गिसबोर्न एयरपोर्ट का यह उदाहरण दिखाता है कि अगर योजना और टीमवर्क सही हो, तो बड़े से बड़ा काम भी बिना किसी समस्या के किया जा सकता है। और यही कारण है कि हर साल लोग यहां आकर ट्रेन और विमान के एक साथ चलने के अद्भुत अनुभव को महसूस करते हैं।